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कोचिंग के फायदे और नुकसान


 कोचिंग के फायदे और नुकसान

कोचिंग के फायदे और नुकसान

कोचिंग के फायदे और नुकसान क्या है? मेरे प्रिय मित्रों एक सवाल अक्सर पूछा जाता है और तैयारी शुरू करने वाले लगभग सभी अभ्यर्थियों के मन में उठता है कि क्या कोचिंग के बिना IAS की तैयारी की जा सकती है। इस पोस्ट के माध्यम से हम यह जानने का प्रयास करेंगे कि हमें क्या करना चाहिए जिससे हम जान सकें कि कोचिंग के फायदे और नुकसान क्या हो सकते है ।
जी हाँ दोस्तों यह एक बहुत बड़ा प्रश्न है लेकिन सच पूछिए तो मैं यही कहूँगा कि अंततः इसका उत्तर आपको स्वयं ही देना होगा या स्वयं ही तय करना होगा।
हमें इस प्रश्न का उत्तर तय करने के लिए कुछ बातों को अपने भीतर देखने की आवश्यकता होती है कि यह सब हममें है अथवा नहीं।
1 सबसे पहली बात तो हमें यह जानकारी होनी चाहिए कि हमें क्या पढ़ना है और उससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह बात कि हमें क्या नहीं पढ़ना है।
हमें यह जानना होगा कि क्या हम यह बात जानते हैं कि हमें क्या पढ़ना है और क्या नहीं।
2 अब हमें यह जानना आवश्यक होता है कि हमें कैसे पढ़ना चाहिए यह पता है
3 इसमें हमें अपने अन्दर के इस गुण को टटोलना होता है कि क्या हम मुख्य परीक्षा में उत्तर लिख सकते हैं।
4 हमें अपने भीतर झाँकना होगा और यह देखना होगा कि क्या हमारा व्यक्तित्व ऐसा है कि हम IAS बन सकें।
5 क्या हम अनुशासित होकर तैयारी करते हैं
दोस्तों वैसे तो बहुत से प्रश्न होते हैं अपने स्तर को जाँचने के लिए लेकिन यह कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न हैं जिनके उत्तर आपको ढूँढ लेने चाहिए।
आप दो पल रूक कर सोचिए कि उल्लिखित गुणों में से आपमें कौन कौन से गुण हैं इनमें से एक है दो है इन सभी गुणों से आप परिपूर्ण हैं या फिर इनमें से एक भी नहीं हैं आपमें।
घबराइये नहीं यदि नहीं हैं तो हो जाएँगे ।
आइये अब जरा जान लेते हैं कि कोचिंग होती क्या है, दोस्तों यह एक विडंबना है कि आज के दौर कोचिंग संस्थानों का संपूर्ण रूप से बाजारीकरण हो चुका है बड़े बड़े शहरों की बात छोडिए गली मोहल्ले भी कोचिंग संस्थानों से पटे हुए हैं और सभी जगह IAS PCS के नाम पर धोखे दिए जा रहे हैं धन वसूली की जा रही है मैं यह नहीं कहता कि सभी कोचिंग संस्थान ऐसे ही हैं लेकिन अच्छे कोचिंग संस्थानों का चयन कर पाना इन हालातों में बहुत ही मुश्किल हो चुका है।
अधिकतर कोचिंग संस्थान पुस्तकों में लिखी बातों को थोडा सा घुमा फिरा कर आपकी नोटबुक में लिखवा देते हैं लीजिये हो गई इतिश्री।
किताबों से ही लिखवाना है तो आप यह तो खुद भी कर सकते हैं।
कोचिंग का मतलब ही होता है आपके अन्दर छिपे गुणों को निकाल कर उसे निखारना, कोचिंग देने वाले का है आपको समझाना बजाए इसके कि आपको पढाना ।

कोचिंग के फायदे

 

आप चाहे घर में रहकर पढें या कहीं कमरा लेकर आप लाख चाहें फिर भी अनुशासित होकर अध्ययन कर सकना लगभग असम्भव होता है बिरले ही होते हैं जो ऐसा कर पाते हैं कोचिंग में अध्ययन करने से आपमें निरन्तरता बनी रहती है जो आपको अध्ययन के प्रति अनुशासित रखती है जो IAS के लिए अत्यंत आवश्यक तत्व है ।
बहुत से लोग होते हैं जो अकेले रहकर तैयारी करते हैं और लगभग हमेशा ही अकेले रहते हैं जिसके कारण उनका अध्ययन भले ही बहुत अच्छा हो किन्तु कहीं न कहीं वह अध्ययन सीमित होकर रह जाता है जो अभिव्यक्ति की दृष्टि से अत्यंत घातक हो सकता है ।
कोचिंग वह स्थान है जहाँ आपकी ही तरह बहुत से अभ्यर्थी होते हैं सभी एक ही मंजिल की तरफ जाने के लिए एक ही गाड़ी से सफर कर रहे होते है। कुछ लोग आपस में मित्र बन जाते हैं और निर्माण हो जाता है एक ऐसे समूह का जिनकी सोच जिनका जोश जिनकी मंजिल सबकुछ एक ही तरह के होते हैं ।
सभी लोग आपस में किसी पढ़े हुए टॉपिक की चर्चा कर सकते हैं किसी समसामयिक मुद्दों पर आपस में विचार विमर्श कर सकते हैं ।
जो आपके लिए लाभप्रद होता है।
एक अच्छे कोचिंग संस्थान में पढ़ाने वाले पढ़ाते नहीं बल्कि आपको समझाते हैं आपका मार्गदर्शन करते हैं क्योंकि कहीं न कहीं वह अनुभवी होते हैं वह सही तरीके से आपके पाठ्यक्रम को पूर्ण करने में आपके सहायक होते हैं।

कोचिंग के नुकसान

 

जैसा कि मैने ऊपर लिखा है कि सही और अच्छे संस्थान का चयन करना एक टेढ़ी खीर होता है इसी क्रम में यदि आपने गलती से किसी गलत संस्थान में प्रवेश ले लिया तो यह आत्महत्या के समान होता है ।
कई लोग ऐसे होते हैं जो कोचिंग संस्थानों के भरोसे ही बैठ जाते हैं मतलब जो वहाँ बताया गया वहाँ तो ध्यान से सुन लिया लेकिन उसे दोहराने की आवश्यकता नहीं समझते यह भी एक नुकसान ही है।
कोचिंग संस्थान में आपको उपलब्ध कराए गए मटेरियल सभी के लिए समान होते हैं मुख्य परीक्षा में उत्तर लेखन के समय सभी उसी मटेरियल की सहायता लेते हैं और लिखते हैं इस कारण सभी के विचार उत्तर पुस्तिका में समान ही रहते हैं ऐसे में आप दूसरे से आगे कैसे निकल सकते हैं।
जहाँ तक कोचिंग की अनिवार्यता का प्रश्न है तो यह कहा जा सकता है कि कोचिंग अनिवार्य बिल्कुल भी नहीं है बहुत से अभ्यर्थी बिना कोचिंग की सहायता के भी सफल हो चुके हैं न केवल सफल हुए हैं बल्कि अच्छा स्थान भी प्राप्त किया है।
इसलिए कोचिंग की आवश्यकता आपको है कि नहीं है आपको प्रवेश लेना है या नहीं लेना है इसका निर्णय आपको स्वयं ही लेना होगा किन्तु प्रवेश लेने से पूर्व आप ऊपर लिखी हुई बातों को मनन अवश्य कर लें।
आपको यह लेख कैसा लगा कृपया कर कमेन्ट करके अवश्य बताइयेगा जिससे मैं ऐसे ही ढेरों लेख लेकर आपके समक्ष आता रहूँ।
हो सके तो इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर कर दीजिएगा।
और यदि मेरे लिए कोई सुझाव हो तो निस्संकोच बता दीजिये मैं निश्चित रूप से आपके सुझावों पर काम करके अच्छा कार्य करने का प्रयास करूँगा ।
आप कुछ प्रश्न करना चाहें तो अवश्य करें कमेन्ट के माध्यम से सही उत्तर देने का प्रयास करूगा ।
और हाँ इसी तरह की पोस्ट प्राप्त करने के लिए सब्सक्राइब कर  लीजिये। इससे मुझे अथाह उत्साह की प्राप्ति होगी।
पोस्ट पढने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
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2 thoughts on “कोचिंग के फायदे और नुकसान

  1. Sir hum ye kaise pta lgaye ki Kon sa sansthan accha hai ya nhi demo class me show krte hai baad me kayi baar syllabus bhi pura nhi krate fees phle hi let lete hai kripya ye bhi btaye ki acche coaching ka chayan kaise ho Mai kvs ki coaching krna chahti hu up l.t. me 70 marks bne hai Tet teen state ki clear hai but abhi Tak Mai koi gov job written clear nhi ker payi ya ye kah lijiye ki mujhe abhyas nhi huya neg marking ka kyuki mere exam 8 saal me teen hi huye isliye Mai coaching krna chahti hu pls guide me.

    1. सर्वप्रथम आपको बधाई कि आपने तीन राज्यों की शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है।
      आपका मुख्य प्रश्न है कि कैसे पता करेंगे कि कोई संस्थान अच्छा है या नहीं।
      आपने सही कहा कि शुरूआत में सभी संस्थान स्वयं को अच्छा दिखाते हैं और शुल्क जमा कर देने के उपरांत उनकी असलियत धीरे-धीरे सामने आती है और तब तक आप फँस चुके होते हैं।
      ऐसा न हो इसके लिए आप सबसे पहले वहाँ के शिक्षकों के बारे में पता करिए कि उनका तरीका क्या है और उनकी गंभीरता कितनी है अभ्यर्थियों के प्रति।
      पता करने का सबसे अच्छा साधन वहाँ पर पढ़ने वाले छात्र छात्राएँ हैं उनसे आप सारी जानकारी ले लीजिये।
      दूसरा साधन उस संस्थान के कर्मचारी जैसे चपरासी हैं यह बहुत महत्वपूर्ण साधन हैं इनसे अवश्य बात करिए।
      यह आपको छिपाये छिपाये भी बहुत सी जानकारियां जो आपके काम की होती हैं आपको बता देते हैं।
      आशा करता हूँ कि आपको समुचित उत्तर प्राप्त हुआ होगा।
      आपके भविष्य के लिए आपको शुभकामनाएं ईश्वर आपका भला करें।
      धन्यवाद

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